कोरोनावायरस के खौफ ने डेंगू को भुलाया, मरीजों की उपेक्षा

सूरत / कोरोनावायरस से बचाव की तैयारियों में स्वास्थ्य विभाग और मनपा इतने व्यस्त हो गए हैं कि डेंगू के मरीजों को भूल गए। आमताैर पर बारिश के बाद कम हो जाने वाला डेंगू अभी तक बड़ी संख्या में मरीजों को परेशान कर रहा है। पिछले दो महीने में सिविल अस्पताल में 1000 से ज्यादा मरीज आए। इनमें जनवरी में 550 और फरवरी में 500 मामले आए। 
 


मनपा का इंकार
मनपा का स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों को नहीं मान रहा है। उसका कहना है की सिविल अस्पताल में कई राज्यों के साथ पूरे साउथ गुजरात से मरीज आते हैं। हम शहर के मरीजों को ही गिनती में रखते हैं। ऐसे हजारों लोग शहर में आते हैं,  ऐसे में शहर में डेंगू का मामला अभी सामान्य है। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के दिनों में होने वाले डेंगू की तुलना में अब बीमारी इतनी असरकारक नहीं है। एनएस 1 एंटीजेन रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव मिल रहे हैं, लेकिन चार से पांच दिन में ठीक भी हो जा रहे हैं। 2018 के अंतिम तीन महीने में लगभग 1900 मरीज आए थे। इनमें अक्टूबर में 563, नवंबर में 700 और दिंसबर में 600 से अधिक मामले आए।
 


उधना, सचिन, डिंडोली, कडोदरा, लिंबायत से ज्यादा मरीज
दो दिन पहले शहर में कई क्षेत्रों में बारिश हुई थी। इससे मच्छर पनप रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि भेस्तान, उधना, सचिन, डिंडोली, कडोदरा, लिंबायत जैसे इलाकों में ज्यादातर श्रमिक लोग रहते हैं। घर के आस पास और छत पर लोग पुराने ड्रम, बाल्टियां, डिब्बे, टायर, बर्तन जैसे सामान पड़े रहते हैं। इनमें पानी जमा हो जाता है। इन्हीं जगहों पर सबसे ज्यादा मच्छर पलते हैं।
 


कुछ बीमारियां तो सालभर चलती रहती हैं: अधिकारी
मनपा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जयसुख वागडिया ने बताया कि अभी डेंगू के मामले कम देखे जा रहे हैं। कुछ मामले तो सालभर चलते रहते हैं। जैसे ही गर्मी के दिन शुरू होंगे, तापमान बढ़ेगा, तो मामले लगभग खत्म हो जाएंगे। रही बात सिविल अस्पताल में डेंगू के मामलों की,  तो हो सकता है वायरल डिसीज हों, जिसके लक्षण डेंगू जैसे हो सकते हैं। हमारी टीम घर-घर जाकर पानी की जांच कर रही है।
 


जिन्हें बाहर का मरीज कह रही मनपा वे अपने शहर के ही हैं
पांडेसरा ग्वालक नगर निवासी 32 वर्षीय अजय राहुल माली सूरत में तीन साल से रहता है। एक जनरल स्टोर पर काम करता है। हफ्ते भर पहले उसे बुखार हुआ। जोड़ों में दर्द के साथ कमजोरी हो गई। इलाज के लिए सिविल अस्पताल आया। डॉक्टरों ने तुंरत एडमिट कर ब्लड सैंपल लिया और डेंगू मलेरिया जांच के लिए लैब भेज दिया। एक दिन बाद ही एनएस 1 एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसी तरह से भेस्तान, उधना, सचिन, डिंडोली, कडोदरा, लिंबायत से मरीज आ रहे हैं।
 


मनपा: डेंगू नहीं वायरल भी हो सकता है
मनपा का कहना है कि मरीज का लगातार प्लेटलेट गिरना डेंगू नहीं वायरल भी हो सकता है। संक्रमण के 7 दिन बाद डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। लिए गए सैंपल हो सकते हैं इससे पहले के हों। हो सकता है कि बुखार में डेंगू के लक्षण मिल रहे हों। बीमारियां समय-समय पर अपने लक्षण और प्रभाव बदलती रहती हैं। डेंगू भी इनमें से एक है। स्वाइन फ्लू भी एक उदाहरण है। डेंगू आमतौर पर चार प्रकार का होता है। इसमें दो प्रभावी होते हैं, जबकि दो का कोई खास असर नहीं होता। हो सकता है यह वही हो।