राजमाता से कहीं आगे बढ़कर वे सच्चे अर्थो में लोकमाता थीं: प्रहलाद भारती


राजमाता से कहीं आगे बढ़कर वे सच्चे अर्थो में लोकमाता थीं: प्रहलाद भारती







 

मंडल स्तर पर मनाई गई  राजमाता जी की पुण्यतिथि  एवं सेवा कार्य कर दी श्रद्धांजलि

 

 

शिवपुरी / भारतीय जनता पार्टी  द्वारा  आज जिले के सभी मंडल स्तर पर  राजमाता विजयराजे सिंधिया जी की पुण्यतिथि का आयोजन किया गया  एवं सेवा कार्य कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई । बैराड़ में पूर्व विधायक प्रहलाद भारती ने राजमाता जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजमाता जी एक ऐसा प्रेरणादायी व्यक्तित्व रही हैं जिन्होनें देश और समाज को आराध्य मानकर अपने जीवन का पल.पल समाज और राष्ट्रसेवा में समिधा बनाकर अर्पित कर दिया। राजमाता जी के जीवन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि जीवन में स्वधर्म पर डटे रहने का साहस और अनेक कष्ट सहन करने की उनकी क्षमताए उनकी शक्ति इस सीमा तक थी कि राजनैतिक क्षेत्र में होने के बाद भी वे धर्मनिष्ठ थींए अध्यात्म में उनकी अपार श्रृध्द्वा थी।  राजमाता से कहीं आगे ब?कर वे सच्चे अर्थो में लोकमाता थीं। राज.परिवार के सुख.वैभव को तिलांजली देकर अपने आराम और स्वास्थ्य की परवाह किए बगैर वे पूरी निष्ठा के साथ लगातार समाज और राष्ट्र के सेवा कार्यो में मनोयोग से लगी रहती थीं। समाज के वंचित वर्गोए वनवासियों और महिलाओं से जुड़े सेवा कार्यो के सिलसिलें में वे लगातार देशव्यापी प्रवास पर रहती थीं।

राजमाता जी ने अपने सार्वजनिक राजनैतिक जीवन में कभी भी सत्ता की राजनीति नही की। उन्होनें राजनीति में रहकर हमेशा मूल्यों और सिद्वांतो की राजनीति के संवर्धन का काम किया। उन्होनें राजनीति में सिद्वांतों से कभी कोई समझौता नही किया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को फैलाने के लिए जो संघर्ष समितियॉ बनाई गई थीं उसमें राजमाता जी की अग्रणी भूमिका थीए संघर्ष समिति के कार्यो के लिए उन्होनें अपनी ओर से न केवल आर्थिक सहयोग दियाए बल्कि जेण्पीण् आंदोलन के पक्ष में जनमत तैयार करने के लिए व्यापक दौरे भी उन्होनें किएण् राजमाता जी राजनीति में राष्ट्र.सेवा की भावना से प्रेरित होकर सक्रिय रहीं। आपातकाल में उन्होनें तिहा? जेल की सीखचों के भीतर अपार कष्ट भोगना स्वीकार कियाए लेकिन कभी भी सिद्वांतो के साथ समझौता नही किया। जिन सिद्धांतों के प्रति वे प्रतिबद्व थीं उनके प्रति हमेशा समर्पित रहीं। राजमहल के सुख.वैभव और सारी सुविधाओं को छोड़कर लगातार एक प्रतिबद्व कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रहना कोई साधारण बात नहीं है। राजमाता जी की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रत्येक मंडल में मंडल अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता के द्वारा राजमाता जी के जीवन के संस्मरण एवं जीवन पर प्रकाश डाला इसके साथ ही सेवा पर्व के रूप में भी राजमाता जी की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई।



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