हरमनप्रीत के जन्म पर दुखी हुए थे रिश्तेदार, कहा था-बेटा होता तो अच्छा रहता; अब शान से बताते हैं उनसे रिश्ता

जालंधर /  भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए आठ मार्च खास दिन है। उनका 31वां जन्मदिन है, महिला दिवस है और टीम ने उनकी कप्तानी में पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल खेला। लेकिन, वह अपने प्रदर्शन से इस दिन को खास नहीं बना पाईं, इस कारण टीम को हार का मुंह देखना पड़ा। आठ मार्च 1989 को जब उनका जन्म हुआ था तब रिश्तेदारों के चेहरे उतर गए थे। सब कह रहे थे कि बेटा होता तो अच्छा रहता है। मुफ्लिसी में बचपन गुजारने वाली हरमनप्रीत ने कड़ी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया है। उसके बाद अब वही रिश्तेदार बड़ी शान से उनके साथ अपना रिश्ता बताते हैं।


हरमन की पहली शर्ट पर लिखा था गुड क्रिकेट


हरमनप्रीत कौर के पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर आज भी उस छोटी सी शर्ट को देखकर खुश हो जाते हैं, जो उन्होंने बेटी के जन्म पर खरीदी थी। पीले रंग की इस शर्ट पर एक बल्लेबाज छपा हुआ है, जिसके नीचे 'गुड क्रिकेट' लिखा हुआ है। 2017 में जब हरमनप्रीत कौर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलीं तो पिता को वही शर्ट याद आई। इतना ही नहीं, इस शर्ट को वह हर मैच के वक्त अपने दिल से लगाकर रखते हैं।


बास्केटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे पिता
हरमनप्रीत कौर के पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर एक वकील के पास क्लर्क (मुंशी) थे। हरमिंदर भुल्लर को बास्केटबॉल खेलने का शौक था। बचपन में स्कूल टीम में खेले भी, पर खेल को कॅरियर बनाने की तमन्ना अधूरी ही रह गई।मोगा की रहने वाली सतविंदर से उनकी शादी हो गई तो जिम्मेदारियों के बीच बास्केटबॉल की खुमारी कहीं खो सी गई। इसके बाद हरमनप्रीत कौर का जन्म हुआ तो उन्हें लगा कि बेटी सपनों को पूरा करेगी।


मुफलिसी से लड़कर बनाया मुकाम
धीरे-धरे बड़ी हो रही हरमनप्रीत कौर टीवी पर पिता के साथ क्रिकेट मैच देखती थी। यहीं से उसे क्रिकेट खेलने का शौक लग गया। हालांकि, परिवार का भरण-पोषण बेहद मुश्किल से चल रहा था, लेकिन बावजूद इसके पिता हरमिंदर सिंह ने बेटी के अरमानों को पंख लगाने के लिए वक्त निकालकर साथ खेलना शुरू कर दिया। थोड़ी और बड़ी हुई तो पड़ोस के बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने लगीं। 10वीं पास करने के बाद उसे ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। कई पुरुष साथी खिलाड़ी अक्खड़ अंदाज में एक-दूसरे से गाली-गलौच की भाषा में बात करने लगते तो हरमन को बुरा लगता था, पर हर बार वह और उनके पिता हरमिंदर यह सोचकर अपने आप को रोक लेते थे कि कहीं बात बिगड़ न जाए। लिहाजा, ट्रेनिंग पर ही फोकस किया।


हरमनप्रीत के क्रिकेट कॅरियर से जुड़ी खास बातें


टॉप ऑर्डर की बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर लंबे छक्के मारने के लिए जानी जाती हैं।


2009 में उनके बैट की जांच भी हुई थी। उसी वक्त बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने इंडियन क्रिकेट टीम में डैब्यू किया था।


जुलाई 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए चोटिल हो जाने के बावजूद धुआंधार बैटिंग की थी।


अक्टूबर 2019 में भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर 100 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली भारत की पहली क्रिकेटर बन गई।


हरमनप्रीत कौर ने भारत की ओर से सबसे ज्यादा टी-20 मैच खेलने वाली खिलाड़ी हैं। धोनी और रोहित शर्मा भी उनसे पीछे हैं।


टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जर्सी का नंबर भी 7 था, अब हरमनप्रीत का भी जर्सी नंबर 7 ही है।



मार्कशीट विवाद में गया डीएसपी का पद
2017 में हरमनप्रीत को राष्ट्रपति ने अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया था। 1 मार्च 2018 को पंजाब पुलिस ने डिप्टी एसपी बना दिया। हरमनप्रीत से कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए आवेदन मांगा गया। इस आवेदन में हरमनप्रीत कौर ने अपनी बीए की मार्कशीट लगाई थी। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से जारी दिखाई गई यही मार्कशीट फर्जी निकली। विश्वविद्यालय को 13 मार्च 2018 को पंजाब पुलिस की ओर से बीए की मार्कशीट के सत्यापन का अनुरोध मिला था। विश्वविद्यालय में इस मार्कशीट का रिकॉर्ड नहीं मिला और यह रिपोर्ट पंजाब पुलिस को भेज दी गई। इसके बाद पंजाब पुलिस का संदेशवाहक पहले सत्यापित की गई मार्कशीट को दोबारा 3 अप्रैल 2018 को विश्वविद्यालय लेकर पहुंचा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोबारा भी अभिलेखों में मार्कशीट का रिकॉर्ड न होने की जानकारी पंजाब पुलिस को 8 अप्रैल को भेज दी थी। इसी के चलते उन्हें पद से हटना पड़ा और इन दिनों महज कॉन्स्टेबल हैं।


Popular posts
प्लास्टिक के दुष्प्रभाव से बचने समझना होगा वेस्ट मैनेजमेंट को
शादीशुदा BF संग भागी प्रेमिका, प्रेमी की पत्नी नही मानी तो प्रेमी पर दर्ज कराया RAPE का मामला
Image
कोतवाली पुलिस ने किए अंधे कत्ल के शेष दो आरोपी गिरफ्तार। 
Image
ग्वालियर। ग्वालियर में तीन मंजिला एक मकान में भीषण आग लगने से सात लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलसे लोगों का इलाज चल रहा है। फायर बिग्रेड आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है। घटनास्थल पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम कमिश्नर सहित प्रशासन के आला अधिकारी और राजनेता भी पहुंच गए। घटना इंदरगंज थाने से महज 100 मीट की दूरी पर हुई। आग कैसे लगी इसकी जानकारी नहीं मिली है।  जानकारी के मुताबिक ग्वालियर के इंदरगंज चैराहे पर रोशनी घर मोड़ पर तीन मंजिला मकान में गोयल परिवार रहता है। हरिमोहन, जगमोहन, लल्ला तीनों भाई की फैमिली रहती है जिसमें कुल 16 लोग शामिल हैं। इस मकान में एक पेंट की दुकान भी है जिसमें आधी रात को भीषण आग लग गई। दुकान की ऊपरी मंजिल में बने मकान में परिवार आग की लपटों में फंस गया।  देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। मामले की जानकरी मिलते ही फायर ब्रिगेड अमला मौके पर पहुंच गया और आग में फंसे परिवार को बचाने लगा। लेकिन तब तक सात लोगों की जिंदा जलकर मौत हो चुकी थी। एडिशनल एसपी ने सात लोगों की मृत्यु की पुष्टि की है। सुबह मौके पर सांसद विवेक शेजवलकर, पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल, चेम्बर अध्यक्ष विजय आदि भी पहुंचे। इस भीषण अग्निकांड की घटना में मृत लोगों के नाम इस प्रकार हैं - 1. आराध्या पुत्री सुमित गोयल उम्र 4 साल 2. आर्यन पुत्र साकेत गोयल उम्र 10 साल 3. शुभी पुत्री श्याम गोयल उम्र 13 साल 4. आरती पत्नी श्याम गोयल उम्र 37 साल 5. शकुंतला पत्नी जय किशन गोयल उम्र 60 साल 6. प्रियंका पत्नी साकेत गोयल उम्र 33 साल 7. मधु पत्नी हरिओम गोयल उम्र 55 साल 
Image
उत्कृष्ट विद्यालय मुरार में नन्हे नन्हे हाथों ने उकेरी रंगोलियां
Image