सीएम कमलनाथ ने भीलों को बताया सम्मानित

; कहा- दोषियों पर कार्रवाई होगी, जिससे दोबारा ऐसी गलती न हो



भोपाल / मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा 12 जनवरी को राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2019 में भील जनजाति के संबंध में पूछे गए सवालों के मामले में सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस निंदनीय कार्य के लिए दोषियों को दंड मिलना चाहिए और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे इस तरह की पुनरावृति भविष्य में ना हो।


सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा- " मैंने जीवनभर आदिवासी समुदाय, भील जनजाति व इस समुदाय की सभी जनजातियों का बेहद सम्मान और आदर किया है। मैंने इस वर्ग के उत्थान और हित के लिए जीवन पर्यन्त कई कार्य किए हैं। मेरा इस वर्ग से शुरू से जुड़ाव रहा है। मेरी सरकार भी इस वर्ग के उत्थान व भलाई के लिए निरंतर कार्य कर रही है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा- "मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 12 जनवरी 2020 को आयोजित मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2019 के प्रारंभिक परीक्षा में भील जनजाति के संबंध में पूछे गए प्रश्नों को लेकर मुझे काफ़ी शिकायतें प्राप्त हुई है। इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।"


आदिवासियों काे अपमानित किया जा रहा है : राकेश सिंह 


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने लोक सेवा आयोग (एमपीपीएसपी) की परीक्षा में पूछे गए विवादित प्रश्न को लेकर कहा कि प्रदेश में आदिवासियों को अपमानित करने वाले तत्वों को बढावा दिया जा रहा है। मीडिया से चर्चा में एमपीपीएससी के प्रश्नपत्र में पूछे गए विवादित प्रश्न को लेकर कडी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आदिवासियों और महापुरूषों को अपमानित करने वाले तत्वों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर भाजपा चुप बैठने वाली नहीं है।


एमपीपीएससी में पूछा गया सवाल गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय 

प्रदेश कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के प्रश्न-पत्र में पूछे गए प्रश्न को गैर-जिम्मेदाराना, तथ्यहीन और निंदनीय बताते हुए कहा है कि इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ओझा ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सभी जनजातियों का सम्मान किया है और भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को शिद्दत से महसूस करते हुए हमेशा उसकी सराहना की है। कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार एमपीपीएससी के प्रश्न-पत्र में पूछे गए इन गैर-वाजिब प्रश्नों की कड़े शब्दों में निंदा करती है।


भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण?
भाजपा विधायक का आरोप है कि एमपी पीएससी परीक्षा की दूसरी पाली के प्रश्नपत्र में आदिवासी समाज की भील जनजाति को लेकर गलत व अमर्यादित टिप्पणी की गई। परीक्षा में गद्यांश से जुड़ा सवाल पूछा गया। सवाल में लिखा था कि भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण यह है कि वे सामान्य आय से देनदारियां पूरी नहीं कर पाते। धन उपार्जन की आशा में अनैतिक कामों में भी संलिप्त हो जाते हैं। इस मामले में एमपी पीएससी सचिव रेणु पंत ने कहा कि वह विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही कुछ कह पाएंगी।


पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- "भील एक स्वाभिमानी, परिश्रमी और कर्मठ जनजाति है। टंट्या भील जैसे अमर और महान क्रांतिकारी को इसी जनजाति ने जन्म दिया। ये अत्यंत भोले-भाले लोग हैं। भील जनजाति पर इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी करना अत्यंत निंदनीय है। मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूँ कि जिसने भी यह प्रश्नपत्र बनाया है, उसके यह विचार हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, साथ ही साथ यह अंश किसी पुस्तक से लिए गए हैं तो सरकार उस पुस्तक पर भी प्रतिबंध लगाए और लेखक के खिलाफ कार्रवाई करे।"


पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर को नोटिस जारी किया गया : एमपीपीएससी
एमपीपीएससी के चेयरमैन प्रो. भास्कर चौबे ने सोमवार दोपहर प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि आयोग की अपनी सीमाएं हैं, नियमों के तहत जो भी कार्रवाई होगी वो की जाएगी। यह एक विशेष मामला है इसे एमपी पीएससी ने मान लिया है। आयोग चेयरमैन ने बताया कि एक आदमी पेपर सेट करता है फिर मॉडरेटर उसे चेक करता है, फिर वह प्रेस में छपने जाता है। मामले में पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर दोनों को नोटिस जारी किया गया है। पश्नपत्र में आए गलत सवालों के संबंध में चौबे ने कहा कि आयोग की समिति द्वारा जांच की जाएगी। 


प्रदेश में 47 विधायक आदिवासी, 11 भाजपा के
दांगोरे ने कहा प्रदेश की विधानसभा की 230 सीटों में 47 विधानसभा क्षेत्र आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। विस में 47 विधायक आदिवासी है जिसमें से 11 आदिवासी विधायक भाजपा के हैं। अकेले खंडवा जिले में भील समाज की आबादी 1.5 से 2 लाख के करीब है। पंधाना विधानसभा क्षेत्र में 76 हजार भील समाज के मतदाता है।